Saturday, 11 April 2015

बनेगा अमरकंटक से मैनपाट तक पर्यटन सर्किट

0 केन्द्र ने दी सैद्धांतिक सहमति, विकसित करने मिलेंगे 75 करोड

रायपुर(जसेरि)। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री अजय चंद्राकर के विशेष प्रयासों से राज्य में अमरकंटक से लेकर मैनपाट तक एक पर्यटन सर्किट बनाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में न केवल प्रस्ताव बन चुका है बल्कि इस प्रस्ताव पर केन्द्र पर्यटन विभाग से सहमति भी बन चुकी है।
उल्लेखनीय है कि मेकल की श्रेणियों से सजा प्रदेश का यह क्षेत्र हरियाली से भरपूर है इसके अलावा यह क्षेत्र नक्सली गतिविधियों से भी अछूता है। इस क्षेत्र की खूबसूरती ने प्रदेश के संस्कृति मंत्री अजय चंद्राकर को छुआ और उन्होंने अपने मंत्री बनते ही विभाग को इस क्षेत्र में पर्यटन सर्टिक बनाने के निर्देश दिए थे। हम यहां यह भी बताते चलें कि राज्य का बस्तर क्षेत्र जहां आज भी आदम संस्कृति धड़कती है उस धरती के स्वर्ग में नक्सली गतिविधियां जारी हैं जिसके चलते राज्य में पर्यटक आने से बिचकते हैं। हालांकि नक्सली गतिविधियों से बस्तर के पर्यटन क्षेत्र बहुत दूर हैं इसके बावजूद भी पर्यटकों का छत्तीसगढ़ प्रवास लगभग न के बराबर है। पर्यटकों के इसी डर को दूर करने के लिए और राज्य में उनको आकर्षित करने के लिए पर्यटन मंत्री अजय चंन्द्राकर ने राज्य के उत्तरी क्षेत्र में पर्यटन सर्किट बनाने के निर्देश दिए थे। उसी के परिपालन में विभाग ने प्रस्ताव बना कर केन्द्र को भेजा और केन्द्र से इस सर्किट को सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी है।
अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार इस वर्ष देश में सर्किट, डेस्टीनेशन, वे साइट, फेस्टीवल तथा ग्रामीण पर्यटन पर विशेष ध्यान दे रही है। उसने देश के 151 प्रोजेक्ट को विकसित करने की योजना बनाई है। केन्द्र सरकार की इस परियोजना में छत्तीसगढ़ के उत्तरी सीमां से लगे सर्किट को भी स्थान मिलने की पूरी संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि यदि यह संभव हुआ तो इस खूबसूरत क्षेत्र में सर्किट विकसित करने के लिए 75 करोड़ रुपए मिलेंगे। वर्तमान में राज्य में प्रतिवर्ष मैनपाट कार्निवाल मनाया जाता है जिसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि मिल रही है।

कौन से पर्यटन क्षेत्र होंगे शामिल
अमरकंटक के छत्तीसगढ़ के क्षेत्र राजमेढ़ गढ़ से नीचे उतरते हुए केन्दा का घना जंगल, उसके बाद रतनपुर का महामाया मंदिर शक्तिपीठ, उसके पश्चात पाली का शिवमंदिर जहां एरोटिक मूर्तियां दीवारों पर खचिंत हैं, हसदेव बांगों डेम, रामगढ़ की विश्व प्रसिद्ध सीता भोंगरा की प्राचीन नाट्यशाला, जिसे मेघदूत की रचना स्थली होने का गौरव प्राप्त है। पुरातात्विक स्थल महेशपुर तथा अंत में मैनपाट की हसींन वादियां जहां के ठंडे वातावरण के कारण तिब्बतियों की बसाहट की गई है शामिल होगा।

फिल्मकारों को भी आकर्षित रहा है क्षेत्र
छत्तीसगढ़ का यह अछूता पर्यटन क्षेत्र फिल्मकारों को आकर्षित करने का माद्दा रखता है। इस क्षेत्र की खूबसूरती के कारण ही यहां हिन्दी फीचर फिल्म काला पत्थर की शूटिंग हो  चुकी है। इसके अलावा यहां ताता पानी, झुनझुना पत्थर से लेकर पर्यटकों को आकर्षित करने की बहुत सी जगहें स्थित हैं।

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