0 विभाग एलर्ट , वन विभाग का दावा स्थिति नियंत्रण में
रायपुर। कोरबा के साल वृक्षों के जंगलों में साल बोरर कीट के हमले की शिकायतें सुनाई दे रही हैं। कोरबा क्षेत्र के जंगलों में बोरर प्रभावित पेड़ों की तनों के नीचे साल बोरर कीट द्वारा भूसा फैलाया हुआ दिखाई दे रहा है। साल बोरर का प्रकोप देखते हुए विभाग चौकन्ना हो गया है। हालांकि विभाग का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है।
उल्लेखनीय है कि साल वनों में साल वृक्ष छेदक कीट जिसे साल बोरर के नाम से जाना जाता है का आक्रमण सामान्य बात है। इस कीट के हमले से साल के वृक्ष सूख जाते हैं पूरे साल के तने को यह कीट बरमें की तरह छेद देता है जिसके चलते उसकी जड़ों के किनारे तने से निकला भूसा बिखर जाता है। कोरबा के जंगलों में इस समय साल बोरर का प्रभाव देखा जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों ने कोरबा क्षेत्र के साल वनों में कीट की उपस्थिति की पुष्टि करते हुए कहा कि साल कीट भी वन के कीट पतंगों का हिस्सा है और उनकी उपस्थिति कोई आश्चर्य की बात नहीं है। अगर जंगल रहेंगे तो साल बोरर भी जंगलों में रहेंगे। यह प्रकृति का नियम है। हम साल कीट से जंगलों के बचाव के लिए विभाग द्वारा सुझाए गए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। वैसे भी साल के जंगलों में इन बोररों के रोगी पेड़ों का प्रतिशत 2 से 3 प्रतिशत है जो दिखने में तो अधिक लग सकता है परतु उसे महामारी के रूप में स्वीकर नहीं किया जा सकता है ताकि इससे जंगलों को नुकसान पहुंचेगा।
बोरर कीट की मुंडी एक रूपए प्रतिनग
वन विभाग ग्रामीणों को साल बोरर के उन्मूलन के लिए बोरर कीट की कटा हुआ सिर लाने पर एक रुपए प्रतिनग के हिसाब से भुगतान करती है। ग्रामीण बोरर को बरसात के मौसम में पकड़ते हैं जब इन कीड़ों का मेटिंंग सीजन होता है। कीड़े पकडऩे के लिए चिन्हिंत किए गए साल के पेड़ को काटा जाता है तथा उसके तने को छीलकर कीट को पकड़ कर मारा जाता है। कीड़े बड़े बदबूदार होते हैं।
दो साल पहले कीटों की भेंट चढ़ चुके हैं कई पेड़
दो साल पहले कवर्धा क्षेत्र तथा मध्य प्रदेश से लगे राज्य के साल वनों में साल बोरर का जबर्दस्त प्रकोप हुआ था जिसके चलते कई पेड़ों को नुकसान पहुंचा था। वन विभाग ने दो साल पूर्व ही साल (सरई) पेड़ों को बचाने के लिए प्रसाय शुरू कर सुरक्षा के उपाय तलाशे हैं जिनका प्रयोग अब किया जा रहा है।
साल बोरर का कोई प्रकोप नहीं
साल बोरर का कोई प्रकोप अभी कोरबा के जंगलों में नहीं हुआ है मात्र दो से तीन प्रतिशत ही बोरर लगे पेड़ दिख रहे हैं। विभाग बोरर से बचाव के लिए पूरी तरह तैयार है उसका ट्रीटमेंट बरसात में किया जाता है।
राम प्रकाश
मुख्य वन संरक्षक

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